स त्वं धर्मभृतां श्रेष्ठ राजानं धर्मसंहितम् । प्रसादय कुरुश्रेष्ठमेतदत्र मतं मम,“इसलिये इस विषयमें मेरा विचार यह है कि तुम धर्मात्माओंमें श्रेष्ठ धर्मपरायण कुरुश्रेष्ठ राजा युधिष्ठिरको प्रसन्न करो
sa tvaṁ dharmabhṛtāṁ śreṣṭha rājānaṁ dharmasaṁhitam | prasādaya kuruśreṣṭham etad atra mataṁ mama ||
অতএব, হে ধর্মধারীদের শ্রেষ্ঠ! ধর্মনিষ্ঠ কুরুশ্রেষ্ঠ রাজা যুধিষ্ঠিরকে প্রসন্ন করো—এই বিষয়ে এটাই আমার মত।
संजय उवाच