कर्णनिधनवृत्तान्तनिवेदनम् | Reporting Karṇa’s Fall to Yudhiṣṭhira
तत् ते न प्रत्यसूयामि न च सर्व विधीयते । प्रभवार्थाय भूतानां धर्मप्रवचनं कृतम्,किंतु मैं तुम्हारे निकट इन दोनों मतोंके ऊपर कोई दोषारोपण नहीं करता; परंतु केवल वेदोंके द्वारा सभी धर्म-कर्मोंका विधान नहीं होता; इसीलिये धर्मज्ञ महर्षियोंने समस्त प्राणियोंके अभ्युदय और नि:श्रेयसके लिये उत्तम धर्मका प्रतिपादन किया है
tat te na pratyasūyāmi na ca sarva vidhīyate | prabhavārthāya bhūtānāṃ dharmapravacanaṃ kṛtam ||
বায়ু বললেন: ঐ মতগুলি ধারণ করার জন্য আমি তোমাকে দোষ দিই না। কিন্তু এমনও নয় যে কেবল বেদ থেকেই সব ধর্মকর্মের বিধান সম্পূর্ণ হয়। তাই ধর্মজ্ঞ মহর্ষিরা সকল প্রাণীর অভ্যুদয় ও পরম কল্যাণের জন্য উত্তম ধর্মের উপদেশ প্রদান করেছেন।
वायुदेव उवाच