कर्णपुत्रवधः (The Fall of Vṛṣasena) — Karṇa Parva, Adhyāya 62
श्रूयते चापघोषो<यं प्रावृषीवाम्बुदस्य ह । “श्रीकृष्ण और अर्जुन शंख बजा रहे हैं, जिनका यह महान् शब्द सुनायी पड़ता है। वर्षाकालके मेघकी गर्जनाके समान उनके धनुषका यह गम्भीर घोष कानोंमें पड़ रहा है
śrūyate cāpaghoṣo ’yaṃ prāvṛṣīvāmbudasya ha
সঞ্জয় বললেন—এ ধনুকের গম্ভীর ঘোষ শোনা যাচ্ছে, বর্ষাকালের মেঘগর্জনের মতো। শ্রীকৃষ্ণ ও অর্জুন শঙ্খ বাজাচ্ছেন; তাঁদের সেই মহাশব্দ কানে এসে পড়ছে।
संजय उवाच