युधिष्ठिरस्य धनंजय-प्रति गर्हा
Yudhiṣṭhira’s Reproach to Dhanaṃjaya
स तु वेगवता मुक्तो बाणो वज्जाशनिस्वन: । विवेश सहसा कर्ण सब्ये पाश्वे महारथम्,वेगवान् युधिष्ठिरका छोड़ा हुआ वज्र और बिजलीके समान शब्द करनेवाला वह बाण सहसा महारथी कर्णकी बायीं पसलीमें घुस गया
sa tu vegavatā mukto bāṇo vajrāśanisvanaḥ | viveśa sahasā karṇaṃ savye pārśve mahāratham ||
প্রচণ্ড বেগে নিক্ষিপ্ত সেই বাণ বজ্র-বিদ্যুতের ন্যায় শব্দ করে হঠাৎ মহারথী কর্ণের বাম পার্শ্বে বিদ্ধ হল।
संजय उवाच