नित्यमत्ताश्न मातड्ा: शूरैम्लेच्छै: समन्विता: । अन्वयुस्तद् रथानीकं क्षरन्त इव तोयदा:,अश्वत्थामा, कौरवपक्षके प्रमुख महारथी वीर, शौर्यसम्पन्न म्लेच्छ सैनिकोंसे युक्त नित्य मतवाले हाथी वर्षा करनेवाले मेघोंके समान मदकी धारा बहाते हुए उस रथसेनाके पीछे- पीछे चल रहे थे
সদা মত্ত গজরাজেরা শূর ম্লেচ্ছ সৈন্যদের সঙ্গে যুক্ত হয়ে সেই রথসেনার পশ্চাতে পশ্চাতে চলল; তারা যেন জলবর্ষণকারী মেঘের মতো মদধারা ঝরাচ্ছিল।
संजय उवाच