Karṇa’s advance against the Pāṇḍava host; Arjuna’s clash with the Saṃśaptakas (कर्णस्य पाण्डवसेनाप्रवेशः—अर्जुनस्य संशप्तकसंप्रहारः)
देवोद्यानानि सर्वाणि प्रियाणि च दिवौकसाम् | ऋषीणामाश्रमान् पुण्यान् रम्याज्जनपदांस्तथा,तप उग्र॑ समास्थाय नियमे परमे स्थिता: । उस समय देवताओंने दैत्योंको परास्त कर दिया था, यह हमारे सुननेमें आया है। राजन! दैत्योंके परास्त हो जानेपर तारकासुरके तीन पुत्र ताराक्ष, कमलाक्ष और विद्युन्माली उग्र तपस्याका आश्रय ले उत्तम नियमोंका पालन करने लगे
devodyānāni sarvāṇi priyāṇi ca divaukasām | ṛṣīṇām āśramān puṇyān ramyāñ janapadāṃs tathā | tapo ugraṃ samāsthāya niyame parame sthitāḥ |
দুর্যোধন বলল—তারা স্বর্গবাসীদের প্রিয় সকল দেব-উদ্যান, ঋষিদের পবিত্র আশ্রম এবং তদ্রূপ মনোরম জনপদসমূহে বিচরণ করত। তারপর উগ্র তপস্যার আশ্রয় নিয়ে পরম সংযম-নিয়মে স্থিত হয়ে তারা তাদের ব্রত সাধন করল।
दुर्योधन उवाच