भीष्मरक्षण-उद्योगः, शिखण्डि-विवर्जनं, सर्वतोभद्र-व्यूहः
Protection of Bhīṣma, Exemption of Śikhaṇḍin, and the Sarvatobhadra Array
आशीविषा इव क्रुद्धा: पर्वते गन्धमादने । उसने अत्यन्त तीखे पचीस नाराच छोड़े। महाराज! वे सब सहसा उस राक्षसराज घटोत्कचपर जाकर गिरे, मानो गन्धमादन पर्वतपर क्रोधमें भरे हुए विषधर सर्प कहींसे आ पड़े हों,आचार्यस्यार्धचन्द्रेण क्रुद्धश्चिच्छेद कार्मुकम् । सोमदत्तस्य भल्लेन ध्वजं चोन्मथ्य चानदत् तदनन्तर महाबाहु राक्षसराज घटोत्कचने अत्यन्त क़ुद्ध हो भैरव गर्जना करते हुए अपने विशाल धनुषको खींचकर अर्धचन्द्राकार बाणसे द्रोणाचार्यके धनुषको काट डाला। फिर एक भल््लके द्वारा सोमदत्तके धवजको खण्डित करके सिंहनाद किया
āśīviṣā iva kruddhāḥ parvate gandhamādane | ācāryasyārdhacandreṇa kruddhaś ciccheda kārmukam | somadattasya bhallena dhvajaṃ conmathya cānadat |
গন্ধমাদন পর্বতে ক্রুদ্ধ বিষধর সাপের মতোই সেই শরগুলি ঝাঁপিয়ে পড়ল। তারপর ক্রোধে জ্বলতে থাকা মহাবাহু ঘটোৎকচ অর্ধচন্দ্রাকার বাণে আচার্য দ্রোণের ধনুক কেটে দিল; আর ভল্ল দিয়ে সোমদত্তের ধ্বজ ভেঙে সিংহনাদ করল।
संजय उवाच