भीष्मशिबिरगमनम् — Duryodhana’s Visit to Bhīṣma’s Camp and the Command Appeal
ये चापरे तित्तिरिजा जवना वातरंहस: । सुवर्णालंकृतैरेतैर्वर्मवद्धि: सुकल्पितै:,तत्पश्चात् काम्बोज देशके अच्छे घोड़े, दरियाई घोड़े, मही, स्विन्धु, वनायु, आरट्ट तथा पर्वतीय प्रान्तोंमें होनेवाले सुन्दर घोड़े--इन सबकी बहुत बड़ी सेनाके द्वारा सब ओरसे घिरा हुआ शत्रुओंको संताप देनेवाला पाण्डुनन्दन अर्जुनका बलवान पुत्र इरावान् हर्षमें भरकर रणभूमिमें कौरवोंकी उस सेनापर चढ़ आया। उसके साथ तित्तिर प्रदेशके शीघ्रगामी घोड़े भी मौजूद थे, जो वायुके समान वेगशाली थे। वे सब-के-सब सोनेके आभूषणोंसे विभूषित थे। उनके शरीरोंमें कवच बँधे हुए थे और उन्हें सुन्दर साज-बाजसे सजाया गया था। वे सभी घोड़े अच्छी जातिके तथा वायुके तुल्य शीघ्रगामी थे
sañjaya uvāca |
ye cāpare tittirijā javānā vātaraṁhasaḥ |
suvarṇālaṅkṛtair etair varma-vaddhiḥ sukalpitaiḥ ||
আরও ছিল তিত্তিরিদেশীয় অন্য অশ্ব—অতিশয় দ্রুত, বায়ুর ন্যায় বেগবান; তারা স্বর্ণালঙ্কারে ভূষিত, বর্মে আবৃত এবং উৎকৃষ্ট সাজে সুসজ্জিত ছিল।
संजय उवाच