Varṣa-Parvata-Nivāsinām Varnanam
Description of Regions, Mountains, and Their Inhabitants
तस्यां गृद्धयन्ति राजान: शूरा धर्मार्थकोविदा: । ते त्यजन्त्याहवे प्राणान् वसुगृद्धास्तरस्विन:,इसीलिये धर्म और अर्थके काममें निपुण शूरवीर नरेश इसे पानेकी अभिलाषा रखते हैं और धनके लोभमें आसक्त हो वेगपूर्वक युद्धमें जाकर अपने प्राणोंका परित्याग कर देते हैं
এই ভূমির প্রতিই ধর্ম ও অর্থে পারদর্শী বীর রাজারা লোভ করে; আর ধনের লালসায় আসক্ত হয়ে তারা তীব্র বেগে যুদ্ধে নেমে প্রাণ পর্যন্ত ত্যাগ করে।
संजय उवाच