भीष्मपर्व — अध्याय ६६: तुमुलसंग्रामवर्णनम्
The Tumult of Battle Described
त॑ यान्तमश्वै रजतप्रकाशै: शरान् वपन्तं निशितान् सुपुड्खान् | नाशवनुवन् धारयितुं तदानीं सर्वे गणा भारत ये त्वदीया:,भारत! चाँदीके समान श्वेत घोड़ोंद्वारा जाते और सुन्दर पंखयुक्त तीखे बाणोंकी वर्षा करते हुए सात्यकिको उस समय आपके समस्त सैनिकगण रोक न सके
হে ভারত! রূপার মতো শুভ্র অশ্বে রথে চড়ে অগ্রসর হয়ে, সুন্দর পালকযুক্ত তীক্ষ্ণ বাণ বর্ষণকারী সাত্যকিকে তখন তোমার সকল সৈন্যদল রোধ করতে পারল না।
संजय उवाच