भीष्मविक्रमदर्शनं तथा क्रौञ्चारुणव्यूहविधानम् | Bhīṣma’s Ascendancy and the Organization of the Krauñcāruṇa Formation
हे राजन्! भगवान् श्रीकृष्ण और अर्जुनके इस रहस्ययुक्त, कल्याणकारक और अद्धुत संवादको पुन:-पुन: स्मरण करके मैं बार-बार हर्षित होता हूँ्ें ।। तच्च संस्मृत्य संस्मृत्य रूपमत्यदभुतं हरे:५ | विस्मयो मे महान् राजन् हृष्यामि च पुन: पुन:,हे राजन! श्रीहरिके उस अत्यन्त विलक्षण रूपको भी पुनः:-पुनः स्मरण करके मेरे चित्तमें महान् आश्चर्य होता है और मैं बार-बार हर्षित हो रहा हूँ
sañjaya uvāca | tac ca saṃsmṛtya saṃsmṛtya rūpam atyadbhutaṃ hareḥ | vismayo me mahān rājan hṛṣyāmi ca punaḥ punaḥ ||
সঞ্জয় বললেন— হে রাজন! শ্রীহরির সেই অতিশয় আশ্চর্য রূপ বারবার স্মরণ করলে আমার অন্তরে মহা বিস্ময় জাগে, এবং আমি পুনঃপুনঃ আনন্দে ভরে উঠি।
संजय उवाच