विभूति-योगः (Vibhūti-yoga) — Exemplary Manifestations as a Contemplative Index
ब्रह्माका जो एक दिन है, उसको एक हजार चतुर्युगीतककी अवधिवाला और रात्रिको भी एक हजार चतुर्युगीतककी अवधिवाली जो पुरुष तत्त्वसे जानते हैं,* वे योगीजन कालके तत्त्वको जाननेवाले हैं १७ ।। अव्यक्ताद् व्यक्तय: सर्वा: प्रभवन्त्यहरागमे । रात्र्यागमे प्रलीयन्ते तत्रैवाव्यक्तसंज्ञके
avyaktād vyaktayaḥ sarvāḥ prabhavanty ahar-āgame | rātry-āgame pralīyante tatraivāvyakta-saṃjñake ||
দিনের আগমনে সমস্ত ব্যক্ত সত্তা অব্যক্ত থেকে উৎপন্ন হয়, আর রাত্রির আগমনে তারা সেই অব্যক্ত-নামক তত্ত্বেই লীন হয়ে যায়।
अजुन उवाच