उत्पातवर्णनम् (Utpāta-varṇanam) — Catalogue of Portents
एकपफक्षाक्षिचरण: शकुनि: खचरो निशि । रौद्रं वदति संरब्ध: शोणितं छर्दयन्निव,रातमें एक आँख, एक पाँख और एक पैरका पक्षी आकाशमें विचरता है और कुपित होकर भयंकर बोली बोलता है। उसकी बोली ऐसी जान पड़ती है, मानो कोई रक्त वमन कर रहा हो
ekapakṣākṣicaraṇaḥ śakuniḥ khacaro niśi | raudraṁ vadati saṁrabdhaḥ śoṇitaṁ chardayann iva ||
রাতে আকাশে এক অশুভ পাখি উড়ে বেড়াল—তার ছিল একটিমাত্র ডানা, একটিমাত্র চোখ ও একটিমাত্র পা। ক্রুদ্ধ হয়ে সে ভয়ংকর ধ্বনি তুলল; তার ডাক যেন রক্ত বমনের মতো শোনাল।
व्यास उवाच