Karma-Saṃnyāsa–Karma-Yoga Saṃvāda
Renunciation and the Discipline of Action
यस्त्विन्द्रियाणि मनसा नियम्यारभतेअर्जुन । कर्मेन्द्रिये: कर्मयोगमसक्त: स विशिष्यतेएं,किंतु हे अर्जुन] जो पुरुष मनसे इन्द्रियोंकों वशमें करके अनासक्त हुआ समस्त इन्द्रियोंद्वारा कर्मयोगका आचरण करता है, वही श्रेष्ठ है
yas tv indriyāṇi manasā niyamyārabhate 'rjuna | karmendriyaiḥ karma-yogam asaktaḥ sa viśiṣyate ||
কিন্তু হে অর্জুন! যে ব্যক্তি মন দ্বারা ইন্দ্রিয়সমূহকে সংযত করে, আসক্তিহীন হয়ে কর্মেন্দ্রিয়ের দ্বারা কর্মযোগে প্রবৃত্ত হয়—সেই শ্রেষ্ঠ।
अजुन उवाच