वेदनार्तशरीरस्य प्रयच्छापो ममार्जुन । त्वं हि शक्तो महेष्वास दातुमापो यथाविधि,“महाथनुर्धर अर्जुन! वेदनासे पीड़ित शरीरवाले मुझ वृद्धको तुम पानी लाकर दो। तुम्हीं विधिपूर्वक मेरे लिये दिव्य जल प्रस्तुत करनेमें समर्थ हो”
vedanārtśarīrasya prayacchāpo mamārjuna | tvaṁ hi śakto maheṣvāsa dātum āpo yathāvidhi ||
“মহাধনুর্ধর অর্জুন! যন্ত্রণায় কাতর আমার এই বৃদ্ধ দেহের জন্য জল এনে দাও। মহেষ্বাস! বিধিপূর্বক জল দান করতে তুমিই সক্ষম।”
संजय उवाच