अभिपेतुर्भुशं क्रुद्धाश्छादयन्तश्न॒ पाण्डवम् | भीष्मके धनुषका काटा जाना कौरव महारथियोंको सहन नहीं हुआ। द्रोण, कृतवर्मा, सिन्धुराज जयद्रथ, भूरिश्रवा, शल, शल्य और भगदत्त--ये सात महारथी अत्यन्त क़ुद्ध हो किरीटधारी अर्जुनकी ओर दौड़े तथा अपने दिव्य अस्त्र-शस्त्रोंका प्रदर्शन करते हुए पाण्डुनन्दन अर्जुनको अत्यन्त क्रोधपूर्वक बाणोंसे आच्छादित करने लगे
sañjaya uvāca | abhipeturbhuśaṃ kruddhāś chādayantaś ca pāṇḍavam |
সঞ্জয় বললেন—তারা সীমাহীন ক্রোধে পাণ্ডুনন্দন অর্জুনের দিকে ঝাঁপিয়ে পড়ল এবং আক্রমণ চেপে ধরে তীরবৃষ্টিতে তাঁকে আচ্ছন্ন করতে লাগল। ভীষ্মের ধনুকের টঙ্কার সহ্য করতে না পেরে দ্রোণ, কৃতবর্মা, সিন্ধুরাজ জয়দ্রথ, ভূরিশ্রবা, শল, শল্য ও ভগদত্ত—এই সাত মহারথী রোষে উন্মত্ত হয়ে কিরীটধারী ফাল্গুনের দিকে ধাবিত হল; দিব্য অস্ত্রশস্ত্রের প্রভাব দেখাতে দেখাতে তারা অর্জুনকে ক্রোধভরে শরে শরে ঢেকে দিল।
संजय उवाच