मद्रेश्वरश्न समरे धर्मपुत्रं महारथम् । पीडयामास संरब्धो भीष्महेतो: पराक्रमी,विराटश्न महाराज सैन्धवं वाहिनीपति: । त्रिंशद्धिर्निशितैर्बाणैराजघान स्तनान्तरे महाराज! सेनापति विराटने भी सिन्धुराज जयद्रथकी छातीमें तीस तीखे बाणोंद्वारा गहरी चोट पहुँचायी
ভীষ্মের কারণে ক্রোধে উদ্দীপ্ত পরাক্রমী মদ্রেশ্বর রণক্ষেত্রে মহারথী ধর্মপুত্রকে পীড়িত করলেন। আর হে মহারাজ, বিরাটও বাহিনীপতি সিন্ধুরাজ জয়দ্রথের বক্ষে ত্রিশটি তীক্ষ্ণ বাণ নিক্ষেপ করে গভীর আঘাত করলেন।
संजय उवाच