भीष्मपर्व — अध्याय ११०: पार्थभीमयोः प्रहारः तथा भीष्माभिमुखं संग्रामविस्तारः
Arjuna and Bhima’s pressure; escalation toward Bhishma
मम सैन्यस्य च क्षेमं तन्मे ब्रूहि पितामह । “पितामह! हमलोग युद्धमें जिस प्रकार आपको जीत सकें, जिस प्रकार हमें विपुल राज्यकी प्राप्ति हो सके और जिस प्रकार मेरी सेना भी सकुशल रह सके, वह उपाय मुझे बताइये' ।। ६८ ह ।। ततोअब्रवीच्छान्तनव: पाण्डवान् पाण्डुपूर्वज:,तब पाण्डुके पितृतुल्य शान्तनुकुमार भीष्मजीने पाण्डवोंसे इस प्रकार कहा --'कुन्तीकुमार! मेरे जीते-जी युद्धमें किसी प्रकार तुम्हारी विजय नहीं हो सकती। सर्वज्ञ! मैं तुमसे यह सच्ची बात कहता हूँ
mama sainyasya ca kṣemaṃ tan me brūhi pitāmaha |
পিতামহ! আমার সেনাবাহিনীর কল্যাণ ও নিরাপত্তার উপায়ও আমাকে বলুন।
संजय उवाच