Adhyāya 108 — Nimitta-darśana and Drona’s counsel amid Arjuna’s advance (निमित्तदर्शनं द्रोणोपदेशश्च)
ततः शतसहस्राणां हयानां सुबलात्मज: | विमलप्रासहस्तानामृष्टितोमरधारिणाम्,तदनन्तर सुबलपुत्र शकुनि एक लाख घुड़सवारोंकी सेनाके साथ युद्धके लिये आ पहुँचा। वे सभी सैनिक अपने हाथोंमें चमकते हुए प्रास, ऋष्टि और तोमर लिये हुए थे। सबको अपने शौर्यका अभिमान था। सभी बलवान, सुन्दर वेशभूषासे सुसज्जित और ध्वजा-पताकासे सुशोभित थे। अस्त्र-विद्याकी शिक्षा पाये हुए युद्धकुशल श्रेष्ठ पैदल सिपाहियोंकी भी बहुत बड़ी संख्या उन घुड़सवारोंके साथ थी
tataḥ śatasahasrāṇāṃ hayānāṃ subalātmajaḥ | vimalaprāsahastānām ṛṣṭitomaradhāriṇām ||
তদনন্তর সুবলপুত্র শকুনি এক লক্ষ অশ্বারোহী সৈন্যসহ যুদ্ধে উপস্থিত হল। তাদের হাতে ঝকঝকে নির্মল প্রাস, ঋষ্টি ও তোমর—সকলেই বীর্যগর্বে উদ্ধত, যুদ্ধকে অগ্রসর করতে উদ্যত।
संजय उवाच