भीष्मरक्षण-प्रकरणम् / The Protective Screen around Bhīṣma and the Śalya–Yudhiṣṭhira Clash
घटमानं यथाशक्ति कुर्वाणं च तव प्रियम् । जुद्दानं समरे प्राणांस्तव वै प्रियकाम्यया,फिर आपके पुत्रको सान्त्वना देते हुए वे उससे इस प्रकार बोले--“बेटा दुर्योधन! तुम इस प्रकार वाग्बाणोंसे मुझे क्यों छेद रहे हो? मैं तो यथाशक्ति शत्रुओंपर विजय पानेकी चेष्टा करता हूँ और तुम्हारे प्रिय साधनमें लगा हुआ हूँ। इतना ही नहीं, तुम्हारा प्रिय करनेकी इच्छासे मैं समराग्निमें अपने प्राणोंको होम देनेके लिये भी तैयार हूँ
sañjaya uvāca | ghaṭamānaṃ yathāśakti kurvāṇaṃ ca tava priyam | yuddhānaṃ samare prāṇāṃs tava vai priyakāmyayā ||
আমি যথাশক্তি চেষ্টা করছি এবং তোমার প্রিয় কাজই করছি। সত্যিই, তোমাকে সন্তুষ্ট করার বাসনায় আমি সমরে নিজের প্রাণ পর্যন্ত বাজি রাখতে—হ্যাঁ, আহুতি দিতে—প্রস্তুত।
संजय उवाच