भीष्मरक्षण-प्रकरणम् / The Protective Screen around Bhīṣma and the Śalya–Yudhiṣṭhira Clash
मातुलः शकुनि: शल्य: कृपो द्रोणो विविंशति: । यत्ता रक्षन्तु गाड़ेयं तस्मिन् गुप्ते ध्रुवोी जय:,(अतः उनकी रक्षाके लिये सारी आवश्यक व्यवस्था करो।) मामा शकुनि, शल्य, कृपाचार्य, द्रोणाचार्य और विविंशति--ये सब लोग सावधान होकर गंगानन्दन भीष्मकी रक्षा करें। उनके सुरक्षित रहनेपर हमारी विजय निश्चित है”
mātulaḥ śakuniḥ śalyaḥ kṛpo droṇo viviṁśatiḥ | yattā rakṣantu gāṅgeyaṁ tasmin guptē dhruvo jayaḥ ||
মামা শকুনি, শল্য, কৃপাচার্য, দ্রোণাচার্য ও বিবিংশতি—এরা সকলেই সতর্ক হয়ে গঙ্গানন্দন ভীষ্মকে রক্ষা করুন; তিনি নিরাপদ থাকলে আমাদের জয় নিশ্চিত।
संजय उवाच