यत् तु मामनुशास्तीह भवानद्य हिते स्थित: । कर्तास्मि तन््महीपाल निर्व॒तो भव पार्थिव,भूपाल! पृथ्वीपते! आज मेरे हितसाधनमें संलग्न होकर आप मुझे यहाँ जो कुछ उपदेश देते हैं, मैं उसका पालन करूँगा। आप संतुष्ट हों मया च भवतां सम्यक् शुश्रूषा या कृतानघा:
যুধিষ্ঠির বললেন—“হে মহীপাল, হে পৃথিবীপতি! আজ আপনি আমার হিতসাধনে স্থিত হয়ে এখানে যা যা উপদেশ দেবেন, আমি তা পালন করব। হে রাজন, আপনি সন্তুষ্ট থাকুন; নিষ্পাপচিত্তে আমি আপনার যথোচিত সেবা করেছি।”
युधिछिर उवाच