Bhīmasya paruṣa-vākyaṃ
Bhīma’s Harsh Speech Heard by Dhṛtarāṣṭra and Gāndhārī
2 7 जा चतुथों5 ध्याय: व्यासजीके 2230 अप कक धृतराष्ट्रको वनमें जानेके अनुमति देना व्यास उवाच युधिष्ठिर महाबाहो यथाह कुरुनन्दन: । धृतराष्ट्रो महातेजास्तत् कुरुष्वाविचारयन्,व्यासजी बोले--महाबाहु युधिष्ठिर! कुरुकुलको आनन्दित करनेवाले महातेजस्वी धृतराष्ट्र जो कुछ कह रहे हैं, उसे बिना विचारे पूरा करो
vyāsa uvāca | yudhiṣṭhira mahābāho yathāha kurunandanaḥ | dhṛtarāṣṭro mahātejās tat kuruṣv avicārayan ||
ব্যাস বললেন—মহাবাহু যুধিষ্ঠির! কুরুবংশের আনন্দস্বরূপ ধৃতরাষ্ট্র যা বলেছেন, সেই মহাতেজস্বীর কথাই বিনা দ্বিধায় সম্পন্ন করো।
व्यास उवाच