धृतराष्ट्रस्य पाण्डवेषु प्रीति-वृत्तान्तः | Dhṛtarāṣṭra’s Affectionate Disposition toward the Pāṇḍavas
याभ्यां दुर्योधनो नीत: क्षयं ससुतबान्धव: । 'ये मेरी दोनों भुजाएँ चन्दनसे चर्चित एवं चन्दन लगानेके ही योग्य हैं, जिनके द्वारा पुत्रों और बन्धु-बान्धवोंसहित राजा दुर्योधन नष्ट कर दिया गया”
yābhyāṃ duryodhano nītaḥ kṣayaṃ sa-suta-bāndhavaḥ |
যে দুই বাহুকে সে চন্দনলেপনেরই যোগ্য মনে করত, সেই দুই বাহুর দ্বারাই পুত্র ও স্বজন-বন্ধুসহ রাজা দুর্যোধন বিনাশে নীত হল।
वैशम्पायन उवाच