धृतराष्ट्रस्य पाण्डवेषु प्रीति-वृत्तान्तः | Dhṛtarāṣṭra’s Affectionate Disposition toward the Pāṇḍavas
धर्मको जाननेवाली गान्धारी अपने मनमें दुःखका बड़ा भारी बोझ ढो रही थी। उसने दुःखोंको मनमें ही दबा लिया और रोते हुए लोगोंसे कहा--'ऐसा न करो” ।। इतरास्तु स्त्रिय: सर्वा: कुन्त्या सह सुदुःखिता: । नेत्रारागतविक्लेदै: परिवार्य स्थिता5भवन्,कुन्तीके साथ कुरुकुलकी अन्य स्त्रियाँ भी अत्यन्त दुःखी हो नेत्रोंसे आँसू बहाती हुई उन्हें घेरकर खड़ी हो गयीं
itarās tu striyaḥ sarvāḥ kuntyā saha suduḥkhitāḥ | netrāragata-vikledaiḥ parivārya sthitā abhavan ||
কুন্তীর সঙ্গে অন্য সব নারীরাও গভীর শোকে আচ্ছন্ন ছিল। চোখে জল জমে ভিজে উঠেছিল; তারা কুন্তীকে ঘিরে দাঁড়িয়ে রইল।
वैशम्पायन उवाच