धृतराष्ट्रदर्शनाय पाण्डवानां प्रयाणम् | The Pāṇḍavas Prepare to Visit Dhṛtarāṣṭra
स मया मूढया पुत्रो ज्ञायमानोडप्युपेक्षित: । तन्मां दहति विप्रर्षे यथा सुविदितं तव,ब्रह्म! मुझ मूढ़ नारीने अपने पुत्रको पहचान लिया तो भी उसकी उपेक्षा कर दी। यह भूल मुझे शोकाग्निसे दग्ध करती रहती है। आपको तो यह बात अच्छी तरह ज्ञात ही है
sā mayā mūḍhayā putro jñāyamāno ’py upekṣitaḥ | tan māṁ dahati viprarṣe yathā suviditaṁ tava brahman ||
আমি মূঢ়া নারী, পুত্রকে চিনেও তাকে অবহেলা করেছি। হে ব্রাহ্মণশ্রেষ্ঠ! সেই অপরাধই শোকাগ্নির মতো আমাকে দগ্ধ করে; হে ব্রহ্মন্, এ কথা আপনার সুবিদিত।
वैशम्पायन उवाच