Adhyāya 71: Kaca and the Saṃjīvanī-vidyā
Devayānī–Śukra Episode
तेजसा निर्दहेल्लोकान् कम्पयेद् धरणीं पदा । संक्षिपेच्च महामेरुं तूर्णमावर्तयेद् दिश:,वे अपने तेजसे सम्पूर्ण लोकोंको भस्म कर सकते हैं, पैरके आघातसे पृथ्वीको कँपा सकते हैं, विशाल मेरुपर्वतको छोटा बना सकते हैं और सम्पूर्ण दिशाओंमें तुरंत उलट-फेर कर सकते हैं
তিনি তাঁর তেজে লোকসমূহকে দগ্ধ করতে পারেন, পদাঘাতে পৃথিবীকে কাঁপাতে পারেন, মহামেরুকেও সঙ্কুচিত করতে পারেন, এবং মুহূর্তে দিকসমূহকে উলট-পালট করে দিতে পারেন।
कण्व उवाच