Adhyāya 71: Kaca and the Saṃjīvanī-vidyā
Devayānī–Śukra Episode
शकुन्तलोवाच यथायमागमो मह्ाां यथा चेदम भूत् पुरा । शृणु राजन् यथातत्त्वं यथास्मि दुहिता मुने:,शकुन्तलाने कहा--राजन्! ये सब बातें मुझे जिस प्रकार ज्ञात हुई हैं, मेरा यह जन्म आदि पूर्वकालमें जिस प्रकार हुआ है और मैं जिस प्रकार कण्व मुनिकी पुत्री हूँ, वह सब वृत्तान्त ठीक-ठीक बता रही हूँ; सुनिये
śakuntalovāca yathāyam āgamo mahān yathā cedam abhūt purā | śṛṇu rājan yathātattvaṃ yathāsmi duhitā muneḥ ||
শকুন্তলা বলল— “হে রাজন! এই মহান কাহিনি যেমনভাবে আমার কাছে এসেছে এবং প্রাচীনকালে যেমন সত্যিই ঘটেছিল, তেমনভাবেই শোনো। আমি যথার্থভাবে সব বলব—আমার জন্ম কীভাবে হলো এবং কীভাবে আমি মুনির কন্যা।”
दुष्यन्त उवाच