अग्निशाप-प्रसंगः
Agni’s Curse and the Restoration of Ritual Order
हुतभुक् सर्वलोकेषु सर्वभक्षत्वमेष्यति “महाभाग! किसी कारणवश महर्षि भृगुने अग्निदेवको सर्वभक्षी होनेका शाप दे दिया है, किंतु वे सम्पूर्ण देवताओंके मुख, यज्ञभागके अग्रभोक्ता तथा सम्पूर्ण लोकोंमें दी हुई आहुतियोंका उपभोग करनेवाले होकर भी सर्वभक्षी कैसे हो सकेंगे?”
“মহাভাগ! কোনো এক কারণে মহর্ষি ভৃগু অগ্নিদেবকে সর্বভক্ষী হওয়ার শাপ দিয়েছেন; কিন্তু তিনি তো সকল দেবতার মুখ, যজ্ঞভাগের অগ্রভোক্তা এবং সর্বলোকের আহুতি-ভোগী—তবে তিনি সর্বভক্ষী কীভাবে হবেন?”
शौनक उवाच