आदि पर्व, अध्याय 67 — गान्धर्वविवाह-समयः
Duḥṣanta–Śakuntalā: Gandharva Marriage and Succession Condition
यस्मिन् काले जपन्नास्ते धीमान् सत्यपराक्रम: । नादेयं ब्राह्मणेष्वासीत् तस्मिन् काले महात्मन:,वसुषेण (कर्ण) बड़ा बुद्धिमान् और सत्यपराक्रमी था। जिस समय वह जपमें लगा होता, उस समय उस महात्माके पास ऐसी कोई वस्तु नहीं थी, जिसे वह ब्राह्मणोंके माँगनेपर न दे डाले
বসুষেণ (কর্ণ) ছিলেন অতিশয় বুদ্ধিমান ও সত্যপরাক্রমী। যে সময় তিনি জপে নিমগ্ন থাকতেন, সেই মহাত্মার কাছে এমন কোনো বস্তু থাকত না যা ব্রাহ্মণরা চাইলে তিনি দান না করতেন।
वैशम्पायन उवाच