Deva–Asura–Gandharva–Nāga Vaṃśa-kathana
Genealogies and Partial Descents
शौनक उवाच महाभारतमाख्यानं पाण्डवानां यशस्करम् | जनमेजयेन पृष्ट: सन् कृष्णद्वैपायनस्तदा,शौनकजी बोले--सूतनन्दन! महाभारत नामक इतिहास तो पाण्डवोंके यशका विस्तार करनेवाला है। सर्पयज्ञके विभिन्न कर्मोके बीचमें अवकाश मिलने-पर जब राजा जनमेजय प्रश्न करते, तब श्रीकृष्ण-द्वैपायन व्यासजी उन्हें विधिपूर्वक महाभारतकी कथा सुनाते थे। मैं उसी पुण्यमयी कथाको विधिपूर्वक सुनना चाहता हूँ
śaunaka uvāca: mahābhāratam ākhyānaṃ pāṇḍavānāṃ yaśaskaram | janamejayena pṛṣṭaḥ san kṛṣṇadvaipāyanas tadā ||
শৌনক বললেন— হে সূতনন্দন! ‘মহাভারত’ নামক এই আখ্যান পাণ্ডবদের যশ বৃদ্ধি করে। সর্পযজ্ঞের নানা ক্রিয়ার অবকাশে রাজা জনমেজয় যখন প্রশ্ন করতেন, তখন কৃষ্ণদ্বৈপায়ন ব্যাস সেই সময় বিধিপূর্বক ক্রমানুসারে মহাভারতের কাহিনি তাঁকে বর্ণনা করতেন।
शौनक उवाच