Āstīka’s Commission and Approach to Janamejaya’s Sarpa-satra (आस्तीक-प्रेषणं यज्ञप्रवेशोपक्रमश्च)
सौतिर्वाच एवं संचोदिता राज्ञा मन्त्रिणस्ते नराधिपम् | ऊचुः सर्वे यथावृत्तं राज्ञ: प्रियहितैषिण:,उग्रश्रवाजी कहते हैं--शौनक! राजा जनमेजयके इस प्रकार पूछनेपर उन मन्त्रियोंने महाराजसे सब वृत्तान्त ठीक-ठीक बताया; क्योंकि वे सभी राजाका प्रिय चाहनेवाले और हितैषी थे
সৌতি বললেন—হে শৌনক! রাজা এভাবে প্রশ্ন করলে, রাজার প্রিয় ও হিতৈষী সেই মন্ত্রীরা যা ঘটেছিল ঠিক তেমনই সমস্ত বৃত্তান্ত নরাধিপকে বললেন।
जनमेजय उवाच