आदि पर्व, अध्याय ३८ — शमीक-उपदेशः, शाप-संदेशः, तक्षक-प्रसङ्गः (Śamīka’s counsel, the curse-message, and Takṣaka’s approach)
ये दन्दशूका: क्षुद्राश्न पापाचारा विषोल्बणा: । तेषां विनाशो भविता न तु ये धर्मचारिण:,जनमेजयके सर्पयज्ञमें उन्हीं सर्पोंका विनाश होगा जो प्राय: लोगोंको डँसते रहते हैं, क्षुद्र स्वभावके हैं और पापाचारी तथा प्रचण्ड विषवाले हैं। किंतु जो धर्मात्मा हैं, उनका नाश नहीं होगा
জনমেজয়ের সর্পযজ্ঞে সেই সর্পদেরই বিনাশ হবে যারা বারবার লোককে দংশন করে, ক্ষুদ্রস্বভাব, পাপাচারী এবং তীব্র বিষধারী; কিন্তু যারা ধর্মাচারী, তাদের বিনাশ হবে না।
शेष उवाच