ब्रह्मोवाच प्रीतो5स्म्यनेन ते शेष दमेन च शमेन च । त्वया त्विदं वच: कार्य मन्नियोगात् प्रजाहितम्,ब्रह्माजी बोले--शेष! तुम्हारे इस इन्द्रियसंयम और मनोनिग्रहसे मैं बहुत प्रसन्न हूँ। अब मेरी आज्ञासे प्रजाके हितके लिये यह कार्य, जिसे मैं बता रहा हूँ, तुम्हें करना चाहिये
ব্রহ্মা বললেন—হে শেষ! তোমার দম ও শম—ইন্দ্রিয়সংযম ও মনোনিগ্রহ—দেখে আমি অত্যন্ত প্রসন্ন। অতএব আমার আদেশে, প্রজাদের কল্যাণার্থে, আমি যা বলছি সেই কাজ তোমাকে করতেই হবে।
शेष उवाच