Ādi-parva Adhyāya 3 — Janamejaya’s Rite, Dhaumya’s Parīkṣā, and Uttanka’s Kuṇḍala Quest (सर्पसत्रप्रस्तावना–गुरुपरीक्षा–उत्तङ्कोपाख्यान)
तमुत्तड़को5भिसृत्य कृतोदककार्य: शुचि: प्रयतो नमो देवेभ्यो गुरुभ्यश्न कृत्वा महता जवेन तमन्वयात्,उत्तंकने स्नान-तर्पण आदि जलसम्बन्धी कार्य पूर्ण करके शुद्ध एवं पवित्र होकर देवताओं तथा गुरुओंको नमस्कार किया और जलसे बाहर निकलकर बड़े वेगसे उस क्षपणकका पीछा किया
উত্তঙ্ক স্নান-তর্পণ প্রভৃতি জলকর্ম সম্পন্ন করে শুচি ও সংযত হয়ে দেবতা ও গুরুদের প্রণাম করল; তারপর জল থেকে উঠে মহাবেগে সেই ক্ষপণকের পশ্চাদ্ধাবন করল।
राम उवाच