न जहीौ पुत्रशोकार्ता जरिता खाण्डवे सुतान् । बभार चैतान् संजातान् स्ववृत्त्या स््नेहविप्लवा,अंडेमें स्थित उन मुनियोंको यद्यपि मन्दपालने त्याग दिया था, तो भी वे त्यागने योग्य नहीं थे। अतः पुत्र-शोकसे पीड़ित हुई जरिताने खाण्डववनमें अपने पुत्रोंको नहीं छोड़ा। वह स्नेहसे विह्नल होकर अपनी तवृत्तिद्वारा उन नवजात शिशुओंका भरण-पोषण करती रही
Vaiśampāyana uvāca: na jahau putraśokārtā Jaritā Khāṇḍave sutān | babhāra caitān saṃjātān svavṛttyā snehaviplavā ||
বৈশম্পায়ন বললেন—সন্তান-শোকে কাতর জারিতা খাণ্ডববনে নিজের পুত্রদের পরিত্যাগ করেনি। মাতৃস্নেহে টলোমলো হয়ে সে নিজ উপায়ে সেই সদ্যজাতদের ধারণ করে লালন-পালন করতে লাগল, তাদেরকে পরিত্যক্ত বলে মানতে চাইল না।
वैशम्पायन उवाच