निवृत्तेष्वथ देवेषु वागुवाचाशरीरिणी,कृष्णमशभ्युद्यतास्त्रं च नादं मुमुचुरुल्बणम् | उन्होंने उस जलते हुए वनको और मारनेके लिये अस्त्र उठाये हुए श्रीकृष्ण तथा अर्जुनको देखा। उत्पात और आर्तनादके शब्दसे उस वनमें खड़े हुए वे सभी प्राणी संत्रस्त- से हो उठे थे। उस वनको अनेक प्रकारसे दग्ध होते देख और अस्त्र उठाये हुए श्रीकृष्णपर दृष्टि डाल भयानक आर्तनाद करने लगे
nivṛtteṣv atha deveṣu vāg uvāca aśarīriṇī | kṛṣṇam abhyudyatāstraṃ ca nādaṃ mumucur ulbaṇam ||
দেবতারা সরে গেলে এক অশরীরী বাণী ধ্বনিত হল। জ্বলন্ত অরণ্যে অস্ত্রোদ্ধত কৃষ্ণকে দেখে তারা ভয়ংকর, উগ্র আর্তনাদ ছাড়ল। সেই অমঙ্গলসূচক ক্রন্দনে বনস্থ সকল প্রাণী আতঙ্কে কেঁপে উঠল।
वैशम्पायन उवाच