Varuṇa’s Bestowal of the Gāṇḍīva and the Arming of Kṛṣṇa–Arjuna
Khāṇḍava Prelude
अवध्यास्तु स्त्रिय: सृष्टा मन्यन्ते धर्मचारिण: । तस्माद् धर्मेण वर्ध त्वं नास्मान् हिंसितुमहसि,“धर्मात्मा पुरुष ऐसा मानते हैं कि स्त्रियाँ अवध्य बनायी गयी हैं। अत: आप अपने धर्मांचरणद्वारा निरन्तर उन्नति कीजिये। आपको हम अबलाओंकी हत्या नहीं करनी चाहिये
ধর্মচারী জনেরা মনে করেন, নারীরা অবধ্য রূপেই সৃষ্ট। অতএব আপনি ধর্মপথে উন্নতি করুন; আমাদের হত্যা করা আপনার পক্ষে শোভন নয়।
वैशम्पायन उवाच