तापसा ऊचु: ग्राहा: पठच वसन्त्येषु हरन्ति च तपोधनान् । तत एतानि वर्ज्यन्ते तीर्थानि कुरुनन्दन,तपस्वी बोले--कुरुनन्दन! उन तीर्थोमें पाँच ग्राह रहते हैं, जो नहानेवाले तपोधन ऋषियोंको जलके भीतर खींच ले जाते हैं; इसीलिये ये तीर्थ मुनियोंद्वारा त्याग दिये गये हैं
তপস্বীরা বললেন—“কুরু-নন্দন! এই তীর্থগুলিতে পাঁচটি গ্রাহ বাস করে; তারা স্নানরত তপোধন মুনিদের জলমধ্যে টেনে নিয়ে যায়। তাই মুনিরা এই তীর্থগুলি পরিত্যাগ করেছেন।”
वैशम्पायन उवाच