Adhyāya 203 — Tilottamā-sṛṣṭiḥ
Creation and Commissioning of Tilottamā
कृतप्रज्ञो5कृतप्रज्ञो बालो वृद्धश्ष मानव: । ससहायो<5सहायश्च् सर्व सर्वत्र विन्द्ति,मनुष्य बुद्धिमान् हो या मूर्ख, बालक हो या वृद्ध तथा सहायकोंके साथ हो या असहाय, वह दैवयोगसे सर्वत्र सब कुछ पा लेता है
kṛtaprajño 'kṛtaprajño bālo vṛddhaś ca mānavaḥ | sa-sahāyo 'sahāyaś ca sarvaṃ sarvatra vindati ||
কর্ণ বলল—মানুষ জ্ঞানী হোক বা মূর্খ, শিশু হোক বা বৃদ্ধ, সহায়সহ হোক বা নিরাশ্রয়—দৈবযোগে সে সর্বত্র সবই লাভ করতে পারে।
कर्ण उवाच