सुप्तास्तु ते पार्थिव सर्व एव कृष्णा च तेषां चरणोपधाने । आसीत् पृथिव्यां शयनं च तेषां दर्भाजिनाग्रास्तरणोपपन्नम्,राजन्! भोजनके बाद वे सब सो गये। कृष्णा उनके पैरोंके समीप सोयी। धरतीपर ही उनकी शय्या बिछी थी। नीचे कुशकी चटाइयाँ थीं और ऊपर मृगचर्म बिछा हुआ था
হে রাজন! ভোজনের পর তারা সকলেই নিদ্রায় গেল। কৃ্ষ্ণা তাদের পায়ের কাছে শয়ন করল। তাদের শয্যা ছিল ভূমিতেই—নীচে কুশের আসন, উপরে মৃগচর্ম বিছানো।
धृष्टह्ुम्न उवाच