Kuntī’s Benediction to Draupadī and the Alliance Gifts (कुन्त्याः स्नुषाशीर्-वचनम् तथा दान-प्रतिग्रहः)
अर्ध तु भीमाय च देहि भगद्रे य एष नागर्षभतुल्यरूप: । गौरो युवा संहननोपपन्न एषो हि वीरो बहुभुक् सदैव,“कल्याणी! ये जो गजराजके समान शरीरवाले हृष्ट-पुष्ट गोरे युवक बैठे हैं, इनका नाम भीम है, इन्हें अन्नका आधा भाग दे दो। वीरवर भीम सदासे ही अधिक भोजन करनेवाले हैं!
“ভদ্রে! যে গজরাজসম দেহধারী, গৌরবর্ণ, যুবক ও সুদৃঢ় হয়ে বসে আছে—সে ভীম; তাকে অন্নের অর্ধাংশ দাও। এই বীর সর্বদাই অধিক ভোজনকারী।”
वैशम्पायन उवाच