मन्दर-समुद्रमन्थन-वर्णनम् / Description of the Churning of the Ocean with Mount Mandara
यथावत् प्रार्थितं लब्ध्वा वरं तुष्टाभवत् तदा | कृतकृत्या तु विनता लब्ध्वा वीर्याधिकौ सुतौ,अपनी प्रार्थनाके अनुसार ठीक वर पाकर वह बहुत प्रसन्न हुई। कद्रूके पुत्रोंसे अधिक बलवान् और पराक्रमी--दो पुत्रोंके होनेका वर प्राप्त करके विनता अपनेको कृतकृत्य मानने लगी
নিজ প্রার্থনা অনুযায়ী যথাযথ বর পেয়ে সে তখন অত্যন্ত প্রসন্ন হল। কদ্রূর পুত্রদের চেয়েও অধিক বলবান ও পরাক্রমশালী—এমন দুই পুত্রের বর পেয়ে বিনতা নিজেকে কৃতার্থ মনে করতে লাগল।
शौनक उवाच