बकवधोत्तर-प्रशमनम् | Post-slaying Stabilization after Baka’s Death
इस प्रकार श्रीमह्याभारत आदिपर्वके अन्तर्गत जद्ुगृहपर्वमें भीमसेनके जल ले आनेसे सम्बन्ध रखनेवाला एक सौ पचासवाँ अध्याय पूरा हुआ ॥/ १५० ॥/ ऑपन-आ क्र बछ। अर क्ज (हिडिम्बवधपर्व) एकपज्चाशदधिकशततमो< ध्याय: हिडिम्बके भेजनेसे हिडिम्बा राक्षसीका पाण्डवोंके पास आना और भीमसेनसे उसका वार्तालाप वैशम्पायन उवाच तत्र तेषु शयानेषु हिडिम्बो नाम राक्षस: । अविदूरे वनात् तस्माच्छालवृक्षं समाश्रित:,वैशम्पायनजी कहते हैं--जनमेजय! जहाँ पाण्डव कुन्तीसहित सो रहे थे, उस वनसे थोड़ी दूरपर एक शालवृक्षका आश्रय ले हिडिम्ब नामक राक्षस रहता था
vaiśampāyana uvāca | tatra teṣu śayāneṣu hiḍimbo nāma rākṣasaḥ | avidūre vanāt tasmāc chālavṛkṣaṃ samāśritaḥ |
বৈশম্পায়ন বললেন—জনমেজয়! কুন্তীসহ পাণ্ডবরা যখন সেখানে শুয়ে ছিলেন, তখন সেই অরণ্য থেকে অল্প দূরে শালবৃক্ষের আশ্রয়ে হিডিম্ব নামে এক রাক্ষস বাস করত।
वैशम्पायन उवाच