Vāraṇāvata-praveśa and Jatugṛha-saṃdeha
Entry into Vāraṇāvata and Suspicion of the Lac-House
यदानुमन्यसे काल॑ यस्मिन् देशे यथा यथा । तथा तथा विधानाय स्वयमाज्ञापयस्व माम्,आप कुमारोंकी अस्त्र-शिक्षाके प्रदर्शनकके लिये जब जो समय ठीक समझें, जिस स्थानपर जिस-जिस प्रकारका प्रबन्ध आवश्यक मानें, उस-उस तरहकी तैयारी करनेके लिये स्वयं ही मुझे आज्ञा दें
আপনি যে সময়কে উপযুক্ত মনে করেন, যে স্থানে এবং যে যে প্রকারের ব্যবস্থা যেমন প্রয়োজন বলে বিবেচনা করেন— সেই সেই আয়োজনের জন্য আপনি নিজেই আমাকে আদেশ করুন।
धृतराष्ट उवाच