Ādi-parva Adhyāya 132 — Duryodhana’s Instructions to Purocana at Vāraṇāvata
Lākṣāgṛha Planning
युधिष्ठिरो रथश्रेष्ठ: सर्वत्र तु धनंजय: । प्रथित: सागरान्तायां रथयूथपयूथप:,युधिष्ठिर रथपर बैठकर युद्ध करनेमें श्रेष्ठ थे। परंतु अर्जुन सब प्रकारकी युद्ध-कलाओंमें सबसे बढ़कर थे। वे समुद्रपर्यन्त सारी पृथ्वीमें रथयूथपतियोंके भी यूथपतिके रूपमें प्रसिद्ध थे
যুধিষ্ঠির রথারূঢ় যুদ্ধে শ্রেষ্ঠ ছিলেন; কিন্তু ধনঞ্জয় (অর্জুন) সর্বত্র—সমস্ত যুদ্ধকলায়—অগ্রগণ্য ছিলেন। সমুদ্রপর্যন্ত সমগ্র পৃথিবীতে তিনি রথদলের অধিনায়কদেরও অধিনায়ক রূপে প্রসিদ্ধ ছিলেন।
वैशम्पायन उवाच