Ādi-parva Adhyāya 132 — Duryodhana’s Instructions to Purocana at Vāraṇāvata
Lākṣāgṛha Planning
एकलव्यस्तु तच्छुत्वा प्रीयमाणो<ब्रवीदिदम् । राजन! तब द्रोणाचार्यने एकलव्यसे यह बात कही--“वीर! यदि तुम मेरे शिष्य हो तो मुझे गुरुदक्षिणा दो'। यह सुनकर एकलव्य बहुत प्रसन्न हुआ और इस प्रकार बोला
ekalavyas tu tac chrutvā prīyamāṇo ’bravīd idam | rājan |
এ কথা শুনে একলব্য আনন্দে পরিপূর্ণ হয়ে (রাজাকে সম্বোধন করে) এভাবে বলল।
वैशम्पायन उवाच