अनुक्रमणिकाध्यायः (Anukramaṇikā Adhyāya) — Invocation, Narrator Frame, and Textual Scope
जरामृत्युभयव्याधिभावाभावविनिश्चय: । विविधस्य च धर्मस्य ह्याश्रमाणां च लक्षणम्,इस ग्रन्थमें बुढ़ापा, मृत्यु, भय, रोग और पदार्थोंके सत्यत्व और मिथ्यात्वका विशेषरूपसे निश्चय किया गया है तथा अधिकारी-भेदसे भिन्न-भिन्न प्रकारके धर्मों एवं आश्रमोंका भी लक्षण बताया गया है
এই গ্রন্থে জরা, মৃত্যু, ভয় ও ব্যাধি, এবং পদার্থের ভাব-অভাবের নির্ণয় বিশেষভাবে করা হয়েছে; আর অধিকারভেদে নানা ধর্ম ও আশ্রমের লক্ষণও বর্ণিত হয়েছে।