उमोवाच वाचा तु बध्यते येन मुच्यते ह्य् अथवा पुनः तानि कर्माणि मे देव वद भूतपते ऽनघ //
এই অধ্যায়ের সপ্তদশ শ্লোক—এখানে মূলপাঠ নির্দেশিত; এর পাঠে মন শুদ্ধ হয় এবং আচরণে ধর্মবৃদ্ধি ঘটে।