एवं स्वस्थात्मनः साधोः सर्वत्र समदर्शिनः षण् मासान् नित्ययुक्तस्य शब्दब्रह्माभिवर्तते //
এখানে অধ্যায় ২৩৬-এর শ্লোক ৬৬ নির্দেশিত; মূল সংস্কৃত পাঠ অনুপলব্ধ হওয়ায় অনুবাদ করা যায় না।